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अयोध्या नगर

Exploring Ayodhya

 पवित्र सरयू नदी के तट पर बसी है अयोध्या। बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा अयोध्या की स्थापना की गई थी। माथुरों के इतिहास के अनुसार, वैवस्वत लगभग 6673 ईसा पूर्व हुए थे। ब्रम्हाजी के पुत्र मरीचि से कश्यप का जन्म हुआ।

कहते हैं कि अयोध्या का पुराना नाम भी अयोध्या ही था, क्योंकि वाल्मीकि रामायण में इसका नाम अयोध्या ही वर्णित है और पुराणों में जब प्राचीन सप्त पुरियों का उल्लेख किया जाता है, तब भी उस नामोल्लेख में 'अयोध्या' शब्द का ही उपयोग किया गया है।

वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या" और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर् से की गई है। अथर्ववेद में यौगिक प्रतीक के रूप में अयोध्या का उल्लेख है- अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या। तस्यां हिरण्मयः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः॥ (अथर्ववेद -- 10.2.31). रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग १४४ कि.मी) लम्बाई और तीन योजन (लगभग ३६ कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी। कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशीराजाओं की राजधानी रहा। स्कन्दपुराण के अनुसार सरयू के तट पर दिव्य शोभा से युक्त दूसरी अमरावती के समान अयोध्या नगरी है।[अयोध्या मूल रूप से हिंदू मंदिरो का शहर है। यहां आज भी हिंदू धर्म से जुड़े अवशेष देखे जा सकते हैं।

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